navaratri kyun manayi jati hai

Navratri क्यों मनाई जाती है?

MAA Durga के पर्व को ही Navratri कहा जाता है। नवरात्र साल में दो बार मनाया जाता है। चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र।

Navratri के दौरान घर-घर में 9 दिनों तक माता की विधि विधान से पूजा आराधना की जाती है। इन दिनों घर और मंदिर में माता को स्थापित करके 9 दिनों तक पूजा-पाठ और व्रत रखे जाते हैं।

इन 9 दिनों के दौरान माता के अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसा माना जाता है, कि Navratri के दिनों में माता रानी की सच्ची निष्ठा भावना के साथ पूजा करने से मुश्किल से मुश्किल काम भी आसान हो जाते हैं।

Navratri क्यों मनाई जाती है?- MAA DURGA KA RUP

आइए जानते हैं, कि नवरात्रि मनाए जाने के पीछे इसकी क्या पौराणिक व वैज्ञानिक कारण है।

Navratri मनाने की पौराणिक कथाएं

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शारदीय Navratri में जिस तरह रीति रिवाज के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है। ठीक उसी प्रकार चैत्र नवरात्र में भी मां दुर्गा के सभी रूपों की पूजा होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार Navratri का त्योहार मनाने के पीछे दो महत्वपूर्ण कारण है।

पहली पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर नामक एक खतरनाक राक्षस था। जो ब्रह्मा जी का बहुत बड़ा भक्त था, जिसने अपनी तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके वरदान पा लिया था, जिसमें महिषासुर को अजय होने का वरदान प्राप्त हुआ जिसका अर्थ है, कोई भी देवी- देवता, दानाव या मनुष्य महिषासुर का वध नहीं कर सकते थे।

इस वरदान को पा लेने के बाद महिषासुर ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया वह वरदान मिलने के बाद काफी आक्रामक हो गया और तीनों लोकों में अपना आतंक मचाने लगा।

इस बात से क्रोधित होकर देवी देवताओं ने ब्रह्मा, महेश विष्णु के साथ मिलकर MAA Durga की रचना की और उन्हें सारे अस्त्र-शस्त्र दिए। इसके बाद शक्ति का रूप मां दुर्गा ने महिषासुर के साथ 9 दिनों तक घमासान युद्ध किया और आखिरकार दसवे दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का नरसंहार किया।

MAHISASUR KA VADHH

इसलिए इस दिन को अच्छाई की बुराई पर जीत माना जाता है। इसी कारण इन दिनों नवरात्रि में माता के 9 शक्तिशाली स्वरूप की पूजा अर्चना होती है और नौवें दिन नौ कन्याओं को Maa Durga का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है।

दूसरी पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम ने रावण की लंका पर आक्रमण करने से पहले और रावण के साथ युद्ध में जीत हासिल करने के लिए पूरे 9 दिनों तक रामेश्वरम में शक्तिशाली मां भगवती की पूजा व व्रत रखा था।

जिससे मां भगवती प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम को लंका पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया।

दसवे दिन भगवान राम ने लंका नरेश रावण को युद्ध में हराकर उसका वध कर लंका पर विजय प्राप्ति की, तब से ही आज तक उसी दसवे दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है और विजयदशमी यानी कि दशहरा से पहले 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित कर शारदीय Navratri का रूप मनाया जाता है।

Navratri मनाने के वैज्ञानिक कारण

ऊपर आपने नवरात्रि मनाने की पौराणिक कथाओं के बारे में जाना। यहां हम जानेंगे कि नवरात्रि मनाने के वैज्ञानिक कारण क्या है? यदि Navratri पर्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो दोनों ही नवरात्र ऋतु यानी चैत्र और शारदीय नवरात्रि संधि काल में आते हैं, यानी कि जब दो ऋतु का आपस में समागम होता है

जिसके दौरान शरीर में कफ, वात, पित्त का समायोजन घट बढ़ जाता है और शरीर के रोग प्रतिरोध तंत्र कमजोर हो जाते हैं।

ऐसे में शरीर के immunity system को मजबूत करने के लिए 9 दिनों तक माता की पूजन व व्रत करके और अनुशासन योग जीवन जीने से हमारे शरीर की साफ सफाई होती है और ध्यान केंद्रीय से मन की शुद्धि भी होती है और उससे आसपास का वातावरण शुद्ध होता है और हमारी immunity system में वृद्धि होती है।

Navratra का महत्व

हिंदू धर्म में नवरात्र का बहुत महत्व है, यह तो सब जानते हैं कि Navratra साल में 2 बार आती है। चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र। चैत्र नवरात्र से हिंदू के new year की शुरुआत होती है।

वही शारदीय Navratri बुराई पर अच्छाई की जीत व असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। यह त्यौहार उस बात का प्रतीक देता है, कि एक तरफ जहाँ माता की ममता सृजन करती है तो वही दूसरी ओर माता का विकराल यानी खतरनाक रप दुष्टों का संहार भी कर सकता है।

Navratri और दुर्गा पूजा दोनों ही अलग-अलग कारणों से मनाया जाता है, हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था यानी की बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानकर नवरात्रि के दिनों में नौ माताओं की पूजा की जाती है।

वहीं दूसरी ओर कुछ हिंदू धर्म का मानना है, कि साल के इन दिनों माता अपने मायके आती है और इसी खुशी में 9 दिनों तक दुर्गा उत्सव यानी दुर्गा पूजा का पर्व मनाया जाता है।

Navratri का पर्व कैसे मनाया जाता है

पूरे भारत में Navratri का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि भारत के अलग-अलग राज्यों में Navratri के पर्व को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में नवरात्र के दौरान माता की नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।

MAA DURGA KA NO RUP- Navratri क्यों मनाई जाती है?

उनके भक्त निष्ठा भाव के साथ पूरे 9 दिनों तक व्रत रखने का संकल्प लेते हैं और पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। जिसके बाद अष्टमी या नवमी यानी कि Navratra के आठवें या नौवें दिन 9 कुंवारी कन्याओं को भोजन कराया जाता है तथा उनकी पूजा की जाती है।

इन 9 दिनों में जगह जगह पर रामलीला का आयोजन किया जाता है। वहीं पश्चिम बंगाल में नवरात्रि के अंतिम 4 दिनों यानी कि षष्ठी से लेकर नवमी तक दुर्गा मां का उत्साह काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। दूसरी ओर Gujarat और Maharasta में Navratri का पर्व डांडिया रास और गरबा डांस की धूम के साथ मनाया जाता है।

राजस्थान में Navratri के समय राजपूत लोग अपनी कुल देवी को खुश करने के लिए पशुओं की बलि भी चढ़ाते हैं। tamilnadu में देवी के पैरों के निशान और प्रतिभा झांकी के रूप को घर-घर स्थापित किया जाता है। जिसे गोलू या कोलू कहते हैं।

जिसे आसपास के पड़ोसी और रिश्तेदार देखने एक दुसरे के घर जाते हैं। वहीं karnatak में नवमी के दिन आयुधा पूजा की जाती है।

Navratri में माता के नौ रूप

  • पहला दिन – शैलपुत्री
  • दूसरा दिन – ब्रह्मचारिणी
  • तीसरा दिन – चंद्रघंटा
  • चौथा दिन – कुष्मांडा
  • पांचवा दिन – स्कंदमाता
  • छठा दिन – कात्यानी
  • सातवां दिन – कालरात्रि
  • आठवां दिन – महागौरी
  • नौवें दिन – सिद्धीदात्री

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