दशहरा इतना फेमस क्यों है और इसे क्यों मनाते हैं

दशहरा इतना फेमस क्यों है और इसे क्यों मनाते हैं

भारत एक सांस्कृतिक देश है। यहां पर त्योहारों का महत्व बहुत ज्यादा है। यहां पर हिंदू और मुस्लिम सभी अपने-अपने त्यौहारों को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं।

हिंदुओं के त्योहार देशभर में बहुत ज्यादा आते हैं और हिंदू इन त्यौहारों को बड़े धूमधाम से मनाते हैं। हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार दशहरा भी है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजा और शौर्य की उपासक रही है।

भारत के सभी प्रमुख त्योहारों में से एक त्यौहार जिसे दशहरा हैं जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार जिसे हिंदू बहुत ही धूमधाम और चाव से मनाते हैं। आज हम इस artcile में दशहरा क्यों मनाया जाता है? इसके बारे में बात करेंगे।

दशहरा

दशहरा हिंदू धर्म का एक प्रमुख और धार्मिक त्योहार है। दशहरा प्रति वर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष दशमी के दिन आता है। इस त्यौहार को विजयदशमी के नाम से भी जानते हैं।

भारत की अलग-अलग जगहों में इस दिन अलग-अलग रूप से दशहरे को मनाया जाता है। दशहरे के दिन रावण के पुतले जलाकर पटाखे फोड़े जाते हैं। रावण के साथ-साथ कई इलाकों में मेघनाथ और उसके भाई कुंभकर्ण के पुतले भी जलाए जाते हैं।

यह त्योहार हर्ष और उल्लास का प्रतीक है। इसके साथ ही यह त्योहार विजय का प्रतीक है। इसीलिए इस त्यौहार को विजयदशमी के नाम से जानते हैं।

दशहरा इतना फेमस क्यों है?

दशहरा त्योहार एक विजय का प्रतीक है। यह हिंदुओं का प्रमुख धर्म है। माना जाता है, कि राजा दशरथ के पुत्र भगवान श्री राम जो राजा दशरथ के सबसे बड़े बेटे थे।

एक दिन राजा दशरथ ने भगवान श्रीराम को अयोध्या का शासक बनाने का सोचा। लेकिन केकई और उसकी दासी के द्वारा रचित षड्यंत्र के कारण भगवान श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने की बजाय उन को 14 वर्ष के लिए वनवास भेज दिया।

जब भगवान श्री राम अपनी पत्नी देवी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास का काल गुजार रहे थे। तब रावण ने अपना एक नया षड्यंत्र रचा और उस षड्यंत्र के आधार पर भगवान श्री राम को और लक्ष्मण को सीता से दूर करके सीता का हरण कर लिया।

सीता को जबरदस्ती रावण अपने साथ लंका लेकर गया। रावण से शादी करना चाहता था और पिता को अपनी पत्नी बनाना चाहता था। लेकिन रावण को ऋषि मुनि का एक श्राप लगा था, कि वह किसी भी नारी को उसकी इच्छा के बगैर नहीं छू सकता है।

इसीलिए रावण में देवी सीता को उनके हा न करने तक अशोक वाटिका में कैद करके रखा था। इधर भगवान श्री राम और लक्ष्मण सीता की खोज में निकल गए। और उन्हें ढूंढते ढूंढते hanuman जी और सुग्रीव के साथ लंका पहुंच गए।

भगवान श्री राम जब लंका पहुंचे और उन्हें पूरी तरह से पता चल गया था, कि देवी सीता को रावण ने अशोक वाटिका(ashok batika) में कैद करके रखा है।

सीता को रावण ने अशोक वाटिका(ashok batika) में कैद करके रखा है

उसके बाद भी भगवान श्रीराम ने दो-तीन बार देवी सीता को वापस भेजने के लिए अपने शांतिदूत के माध्यम से रावण तक बात पहुंचाई। लेकिन रावण भगवान श्री राम के शांतिदूत की बात ना मानकर युद्ध के लिए तैयार हुआ।

भगवान श्री राम और रावण के बीच युद्ध प्रारंभ हुआ और कई दिनों तक युद्ध लगातार चलता रहा। युद्ध के दौरान एक के बाद एक रावण के महारथी मर गए और अंत में मेघनाथ, कुंभकरण और उसके साथ-साथ रावण का वध भी भगवान श्रीराम ने कर दिया।

रावण का वध - दशहरा इतना फेमस क्यों है

भगवान राम ने रावण का वध आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन किया था और इसी दिन से यह त्यौहार विजयादशमी और दशहरा के रूप में मनाया जाता है।

दशहरा क्यों मनाते है?

रावण के 10 सिर जो 10 पापो के सूचक थे। जैसे:- काम, क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, आलस्य, झूठ, अहंकार, मद और चोरी इनका अंत हो गया और इसी खुशी में इस दिन रावण का पुतला जलाकर लोग बुराइयों का नाश करते हैं और विजय प्राप्त होने का उत्साह मनाते हैं।

पुतला जलाकर लोग बुराइयों का नाश करते हैं - दशहरा इतना फेमस क्यों है

लोग इस त्योहार को मनाते समय ऐसा मानते हैं, कि साल भर में बुराइयां रावण की मूर्ति की तरह बड़ी हो गई है। उनका अग्नि में स्वाहा करके आज से वापस अच्छाइयों के साथ जीना है। यह त्योहार आज की युवा पीढ़ी के लिए अन्याय और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।

यह त्योहार यह साबित करता है, कि अन्याय और अधर्म से व्यक्ति कितना ही ताकतवर और शक्तिशाली क्यों ना हो। एक दिन उसका अंत और विनाश का यह है। दशहरा शक्ति और विजय का त्यौहार है। लेकिन आज के समय दशहरे को एक मनोरंजन के लिए मनाया जाता है।

इतिहास में हर युग में कोई न कोई असुर और राक्षस रहा है। जो अपने अधर्म से दुनिया के विनाश के लिए तुला हुआ था। लेकिन एक दिन उसका अंत हुआ। उदाहरण के तौर पर त्रेता युग में रावण, मेघनाथ और ताड़का का अंत हुआ।

द्वापर युग में कंस, दुर्योधन, शकुनी उतना का अंत हुआ। लेकिन आज के समय में यह कलयुग और बढ़ता जा रहा है और रोजाना नए-नए राक्षस पनप रहे हैं

भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन आदर्श और मर्यादा की शिक्षा लोगों को देता रहा। हर व्यक्ति अपने जीवन के सुख-दुख को अटल नियम के साथ गुजार सकता है।

व्यक्ति के जीवन में स्वार्थ और लोभ की भावना व्यक्ति के अंदर के मनुष्य का नाश कर देती है। दशहरा का त्योहार सत्य की विजय का एक अहम सबूत और प्रमाण है। इस दिन लोग भगवान जय श्रीराम के नारे लगाते हैं और रावण के पुतले का अंत करके पटाखे फोड़ते हैं।

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